श्रावण मास की कथा

श्रावण मास की कथा story of shravan month

हेलो मेरे प्यारे दोस्तों,आप सभी का स्वागत है हमारे इस नई कहानी में। आज मैं लेकर आया हूं,"श्रावण मास की कथा" यह कथा पुराने जमाने में जब से सावन मास में भगवान शंकर की पूजा होने लगी थी, तब की है। तो आइए शुरू करते हैं।


श्रावण मास की कथा
श्रावण को भगवान शिव का प्रिय माह माना जाता है, इसीलिए इस महीने में महादेव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस माह में की गई पूजा, उपासना का विशेष फल भक्तों को प्राप्त होता है।



श्रावण मास की कथा
 भगवान शिव को सावन का महीना ही इतना क्यों प्रिय है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योग्य शक्ति द्वारा अपने देह का त्याग किया था।



श्रावण मास की कथा
उससे पहले देवी सती ने महादेव को प्रत्येक जन्म में पति के रूप में पाने का निर्णय किया था। दूसरे जन्म में देवी सती ने राजा हिमाचल तथा रानी मैना के घर में पार्वती के रूप में जन्म लिया था। पार्वती के रूप में देवी सती ने सावन के मास में अन्न-जल त्याग कर कठोर तपस्या किया था। और मां पार्वती की इसी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था। उसी समय से भगवान शिव को सावन माह अतिप्रिय है। 


कई लोगों का मानना है कि सावन में भगवान शिव की पूजा व सोमवार की व्रत करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। हिंदू धर्म में सावन के महीनों का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार किया 2023 में सावन 4 जुलाई से शुरू होगा और 31 अगस्त को समाप्त होगा।
श्रावण मास की कथा
एक अन्य मान्यता के अनुसार श्रावण मास में भगवान श्री राम ने भी सुल्तानगंज से जल लिया और देवघर स्थित वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया। बस तभी से श्रावण में जलाभिषेक करने की परंपरा भी जुड़ गई। शिव का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालु हरिद्वार,काशी और कई जगह से गंगाजल लेकर कावड़ यात्रा करते हैं।

सावन मास में भगवान शिव का पूजा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस महीने में लोग माथे में अभिषेक तथा चंदन लगाते हैं। लोग नए-नए वस्त्र पहनते हैं और "हर हर महादेव" का नारा लगाते हैं। सावन का महीना कांवरिया के लिए विशेष होता है। कांवरिया सुल्तानगंज से जलभर कर देवघर जाते हैं। तथा महादेव का पूजा करते हैं। आपको हमारी यह छोटी सी जानकारी कैसी लगी? कमेंट करके जरूर बतायें।


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