हिंदी की महान कविताएं
हिंदी की महान कविताएं |great poems in hindi
हिंदी साहित्य में कई महान कवियों द्वारा रचित कविताएं हैं। जो हमारी सांस्कृतिक और भाषाई धरोहर को प्रकट करती हैं। यहां कुछ हिंदी की महान कविताओं का उल्लेख किया गया है।
1. "राष्ट्रीय गीत"
2. "मधुशाला"
3. "तू न हो निराश कभी मन से"
4. "वंदे मातरम"
5. "मैं तेरे प्यार में दीवाना हो गया"
हिंदी की महान कविताएं
1. "राष्ट्रीय गीत" रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित कविता है। यह कविता भारतीय राष्ट्रीय गान के रूप में मान्यता प्राप्त की गई है। इस कविता में टैगोर ने भारत की विभिन्न संस्कृति, धर्म, भाषा, समाज और एकता की महिमा को व्यक्त किया है। यह कविता भारतीयता और देशप्रेम के भावों को प्रशंसा करती है और एक राष्ट्रीय आत्मगौरव की भावना को जगाती है।
यह राष्ट्रीय गीत का पहला स्तंभ है:
जन-गण-मन अधिनायक जय हे,
भारत भाग्य विधाता।
पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा
द्राविड़ उत्कल बंग।
विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा
उच्छल जलधि तरंग।
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभ आशीष मांगे,
गाहे तव जय गाथा।
जन-गण-मंगलदायक जय हे,
भारत भाग्य विधाता॥
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे।।
यह राष्ट्रीय गीत भारतीय राष्ट्रीयता और एकता के आदर्शों को प्रतिष्ठित करती है और भारतीयों के मन में एक गर्व और उत्साह की भावना जगाती है।
हिंदी की महान कविताएं
2. "मधुशाला" हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित एक मशहूर कविता है। यह कविता हिंदी साहित्य की बेहतरीन कविताओं में से एक मानी जाती है। "मधुशाला" शब्द का अर्थ होता है "मदिरालय" या "शराब का घर", लेकिन इस कविता में बच्चन ने शराब को एक उपाय और जीवन के रंग के रूप में प्रस्तुत किया है। यह कविता अपनी सुंदरता, विचारशक्ति और सर्वदेशीय भावनाओं के लिए प्रसिद्ध है।
आँधी आयी है, घर से उड़ जाना है,
संसार से उड़ जाना है,
रूह के साथ ज़िन्दगी भी बेहिसाब पीने का नाम है,
मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।
अपनी ज़िन्दगी को जीने का तरीका सिखा रही है,
मैं तो अपनी ही मधुशाला में खोया रहा हूँ।
मैं पीता हूँ अपनी मधुशाला को,
मेरी मधुशाला मुझसे कह रही है,
तेरी अँखों की मस्तियों का आँगन हूँ मैं,
तेरी बांहों का गुलदस्ता हूँ मैं।
मधुशाला, मधुशाला, मधुशाला!
बस इतना समझ लीजिए,
मैं हूँ उस मधुशाला का पिया,
जिस मधुशाला में ना जाने कितने मदिरालय हैं,
ना जाने कितनी मधुर यात्राएँ हैं।
जो ताने बजा रही हैं, जो नग़मे गा रही हैं,
जिस नाचीज़ की इच्छा ना जाने कितने मुर्दे हैं,
जो खेल रही हैं जिसमें रस ना जाने कितने मर्ते हैं,
वह मधुशाला, वह मधुशाला, वह मधुशाला!
आप पीने वालों को उबारती है,
जीने वालों को जीने का सलीका सिखाती है।
चाहिए थोड़ी मदिरा भी,
बाक़ी सब प्याले ख़ाली कराती है।
कविता की अमृत मधु के साथ चलो,
चलो ज़िन्दगी की मधुशाला की ओर।
ये सच है, या सपना, ये दिल की हकीकत है,
ज़िन्दगी की मधुशाला, चाहिए मन को बहलाने का मतलब है।
जब चाहे पी लेते हैं, जब चाहे छोड़ देते हैं,
दोनों का हाथ नहीं जोड़ते हैं,
मुझे ये दुख नहीं जोड़ता,
मधु जब चाहे, विलाप करता है, गवाही देता है।
मधुशाला, मधुशाला, मधुशाला!
मेरे नाम का आलाप तो होगा,
उन जगहों पर, जहाँ नशा होगा,
उन मकानों में, उन गलियों में,
जहाँ मेरी मधुशाला की रौशनी होगी,
वहाँ मेरे नाम की पुकार होगी।
वहाँ मेरे नाम की गुनगुनाहट होगी,
मधुशाला, मधुशाला, मधुशाला!
आओ जिंदगी का आपान और पिलाओ,
जाम उठाओ, जाम उठाओ, जाम उठाओ।
जिस तरफ़ देखो, वहाँ मधुशाला है,
जिस तरफ़ देखो, वहाँ नया सवेरा है।
हम देखेंगे, जब लहरें बदलेंगी रंग,
हम देखेंगे, जब मौत आएगी संग,
हम देखेंगे, जब भीड़ ज़िन्दगी की हिलेगी,
मधुशाला, मधुशाला, मधुशाला!
जीवन की मधुशाला में यही पीने का तरीका है,
बस इतना समझ लेना है।
हिंदी की महान कविताएं
3. "तू न हो निराश कभी मन से" कविता का रचयिता हरिवंश राय बच्चन हैं। हरिवंश राय बच्चन एक प्रसिद्ध हिंदी कवि और साहित्यिक थे। जिन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से अमिट उत्साह, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संदेश दिया है। उनकी कविता "तू न हो निराश कभी मन से" एक प्रसिद्ध और प्रिय रचना है जो लोगों के दिलों में स्थान बनाई हुई है। यह कविता उम्मीद, आशा और आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका को व्यक्त करती है।
तू न हो निराश कभी मन से,
जीना तेरे बिना कठिन है संसार में।
हार मानना तो है ताकत का विरोधी,
आगे बढ़, जीत है विजय का आधार में।
तू न हो निराश कभी मन से,
उदास चेहरों को मुस्कराने की आदत दे।
अधिकारियों की नादानी से ना घबरा,
खुद को सामर्थ्यवान और स्वतंत्र बना दे।
तू न हो निराश कभी मन से,
अपने सपनों की पीछे भाग,
संघर्षों को गले लगा, सामरिक हो जा।
चुनौतियों को स्वीकार, आगे बढ़ जा,
सच्ची खुशियों की ओर अपने कदम रखा जा।
तू न हो निराश कभी मन से,
नाकामियों से सीख, हारने ना दे।
अन्याय का सामना कर, सत्य का पाठ पढ़,
समर्पण और समरसता के रास्ते चुन ले।
तू न हो निराश कभी मन से,
विश्वास रख अपने सपनों में।
बदलते समयों में आपात परिस्थितियों में,
दृढ़ता, समर्पण और विजय की प्रतीक्षा में।
तू न हो निराश कभी मन से,
उठा और चल, बाधाओं को हरा दे।
जीवन के विचार को बदल, आगे बढ़,
खुद को जीने का सच्चा मतलब समझा दे।
तू न हो निराश कभी मन से,
आशा की डोर से जगाए अपने सपनों को।
कर ले अपने कर्मों का त्याग,
और संसार को दिखा दे तू अपने योग्यताओं को।
हिंदी की महान कविताएं
4. वन्दे मातरम" कविता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखी है। यह कविता उनकी प्रसिद्ध उपन्यास "आनंदमठ" में प्रकट हुई थी, जो 1882 में प्रकाशित हुआ। "वन्दे मातरम" ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बड़ी महत्वपूर्णता प्राप्त की है और यह भारतीय राष्ट्रीय गान के रूप में विख्यात हो गई है। यह कविता देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रकट करती हैं।
वन्दे मातरम्!
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्।
वन्दे मातरम्!
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमिता द्रुमदलशोभिनीम्।
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वन्दे मातरम्!
वन्दे मातरम्!
तुमि विद्या, तुमि धर्म,
तुमि हृदये, तुमि मर्म।
त्वं हि प्राणाः शरीरे बाहुते,
त्वं हि मा शक्ति, हृदये तुमि मातरम्।
वन्दे मातरम्!
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला, कमलदलविहारिणी।
वाणी, विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्।
नमामि कमलां अमलां अतुलां,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वन्दे मातरम्!
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिणीं,
सुखदां वरदां मातरम्।
वन्दे मातरम्!
वन्दे मातरम्!
हिंदी की महान कविताएं
5. "मैं तेरे प्यार में दीवाना हो गया" कविता सूरदास द्वारा लिखी गई है। सूरदास भक्ति काल के मशहूर संतों में से एक हैं और उनकी कविताएं प्रेम और भक्ति के विषयों पर आधारित होती हैं। "मैं तेरे प्यार में दीवाना हो गया" भी उनकी प्रसिद्ध कविताओं में से एक है जो प्रेम के अद्वितीय अनुभव को व्यक्त करती है।
मैं तेरे प्यार में दीवाना हो गया,
बंधन तो मैंने सारे छोड़ दिए।
खुद को मैंने तोड़ दिया है,
तेरे नाम का जपा करता हूँ।
भजन जपता हूँ, आराधना करता हूँ,
प्रेम का सगुन निराकार करता हूँ।
उलटे-सीधे, चिढ़ चिढ़ कर,
तेरे लीला में खो जाता हूँ।
राधा के संग मैं खेलता हूँ,
माखन चुराता हूँ, मधु पीता हूँ।
गोपियों के दिल में वास करता हूँ,
तेरे प्यार में मस्त हो जाता हूँ।
राधा के चरणों में सिर झुकाता हूँ,
गोपियों से तूल मिलाता हूँ।
सुरदास का दीवाना हो गया,
बंधन तो मैंने सारे छोड़ दिए।
प्यार की राह में मैं भटक रहा हूँ,
तेरे दर को ढूंढ़ रहा हूँ।
जब भी मैं तेरे पास जाता हूँ,
अपनी हकीकत भूल जाता हूँ।
मैं तेरे प्यार में खो गया हूँ,
दुनिया को भूल गया हूँ।
मेरी सारी ख्वाहिशें साकार हो गईं,
जबसे मैंने तुझे प्यार किया हूँ।
इस प्यार की महिमा को जगाने आया हूँ,
तुझे अपने संग सजाने आया हूँ।
मैं तेरे प्यार में दीवाना हो गया,
बंधन तो मैंने सारे छोड़ दिए।

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